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5. आरग्वध (अमलतास)

5. आरग्वध (अमलतास)

लैटिन नाम: Casia Fistula Linn.

परिवार: लेगुमिनोसे।

अंग्रेजी : Pudding pipe tree.

हिन्दी : अमलतास सोनाहाली।

तेलुगु: रिलेकाया।

फारसी : कयारेशम्बर।

संस्कृत: अरवध.

बंगला : सोनालु ।

मराठी: बहवा.

गुजराती: गार्मालो.

कन्नड़ : हेग्गके।

परिचय

प्रायः अमलतास का वृक्ष मध्यम आकार का होता है। १२ से १८ इंच तक लम्बी पत्रवृत्तों पर ४ से ८ जोड़े पत्ते लगे होते हैं जो १.५ इंच से ३.५ इंच तक लम्बे व अण्डाकार होते हैं। १० से २० इंच तक लम्बे पुष्पवृत्त पर चमकीले स्वर्णिम पीत वर्ण के पांच दल वाले पुष्प घने रूप में लगते हैं। जो चैत्र मास के अन्त से ज्येष्ठ मास तक वृक्ष को शोभायुक्त रखते हैं। ज्येष्ठ माह में इस पर पतली-पतली प्रायः १ फुट तक लम्बी गोलाकार फलियाँ लगती हैं जो वर्षा के अन्त तक वृक्षों पर हरी-हरी फलियाँ लटकी रहती है। हेमन्त ऋतु में यह फलियाँ काले रंग की हो जाती हैं और वसन्त ऋतु में पकतो हैं। फली का त्वक् कठोर होता है तथा इसके अंदर ५० पैसे के सिक्के की तरह गोल- गोल पतले-पतले काले रंग के रस मज्जा लिपटे होते हैं। परतों के मध्य में इसके बीज शिरीष बीज के समान होते हैं।

रासायनिक संगठन

अमलतास के मज्जा में गोंद, पेक्टिन, रंजक पदार्थ, शर्करा व अल्पमात्रा में, मधुर गंध वाला उड़नशील तेल तथा अन्य पदार्थ पाये जाते हैं।

गुण: भारी, चिकना.

वीर्य : शीत।

रस : मधुर, तिक्त।

परिणाम: मीठा.

प्रयोग

अमलतास के मज्जा का प्रयोग करते हैं। यह दाहशामक, वेदनास्थापक,

अनुलोमक एवं उत्तम मृदुविरेचक है।

अमलतास को विरेचन देने हेतु सनाय के साथ अवेलह बनाकर देने से रोगी को किसी प्रकार का पेट में मरोड़, शूल आदि उपद्रव नहीं होता। इसका प्रयोग विशेष रूप से ज्वर रोगी, कोमल प्रकृति का व्यक्ति बालक एवं गार्भिणी स्त्रियों में देना चाहिये। बराबर कब्ज रहने वाले को अमलतास का गुलकन्द लगातार सेवन करना चाहिए।

गले के शोथ में वृक्ष के छाल का काढ़ा बनाकर बड़ों को २ से ४ चाय चम्मच की मात्रा में तथा बच्चों को ५ से १० बूंद की मात्रा में २ से ३ घंटे के अन्तर से देने पर शीघ्र लाभ होता है। दाद पर पत्र स्वरस को लगाते रहने से लाभ मिलता है। इसके गूदे को पीसकर बच्चे की नाभी पर लेप करने से पेट का फूलना एवं दर्द दूर होता है। इसकी चटनी बनाकर चाटने से सूखी खांसी में लाभ होता है। आंव रोगी को भी दवा देने से पूर्व इस गूदे के घोल को पिलाकर २ से ३ दस्त करा ले। फिर दवा दे।

हरे मकोय के साथ अमलतास के मज्जा को पीसकर इसका गरम-गरम लेप करने से गठिया, दर्द व शोथ पर लेप करने से शीघ्र आराम मिलता है।

प्रयोज्य अंग

विशेष रूप से मज्जा।

मात्रा

४ से ८ ग्राम। इसके अतिरिक्त मूल, पत्र एवं काण्ड त्वक् का भी प्रयोग करते हैं।

फल मज्जा

१ से २ तोला । निवेचनार्थ २ से ४ तोला । मूल त्वक् क्वाथ ५-१० तोला, पुष्प १ तोला ।

विशिष्ट योग

आरग्वधादि तेल, आरग्वधादि लेह एवं आरग्वधारिष्ट ।

Sonu Vaatya

Medicinal Plants And Seeds Expert

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