कुशा (कुश) एक विशेष प्रकार की घास है जिसका हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों और तांत्रिक क्रियाओं में महत्वपूर्ण स्थान है। यह घास पवित्रता, सात्विकता और विवेक का प्रतीक मानी जाती है। कुशा का उपयोग पूजा-अनुष्ठानों में आसन, पवित्री (अंगूठी) और मंडप आदि की रचना में होता है। तंत्र शास्त्रों में कुशा की जड़ (कुश मूल) को धन-संपत्ति और समृद्धि प्रदान करने वाला बताया गया है। इसे विशेष मुहूर्त में लाकर पूजा स्थल या तिजोरी में रखने से आर्थिक वृद्धि होती है। citeturn0search0
कुशा के तनों में पाई जाने वाली काली गांठ, जिसे ‘कुश का बांदा’ या ‘कुश ग्रंथि’ कहा जाता है, समृद्धिदायक मानी जाती है। इसे भरणी नक्षत्र में लाकर गंगाजल से धोकर पूजा स्थल पर लक्ष्मी स्वरूप मानकर स्थापित किया जाता है। विधि-विधान से पूजन के बाद इसे लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी या भंडार में सुरक्षित रखने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। citeturn0search1
‘कुश का बांदा’ उत्पाद लगभग 8 इंच लंबा होता है और इसे पूजा स्थल, अध्ययन कक्ष या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रखा जाता है। यह एक शुभ प्रतीक है जो समृद्धि, एकाग्रता और सफलता को आकर्षित करने में सहायक माना जाता है। The Natural Plants https://thenaturalplants.com/?post_type=product&p=240895&preview=true





