Sulemani Hakik Mala | सुलेमानी हकीक

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सुलेमानी हकीक, जिसे अंग्रेजी में अगेट (Agate) कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण रत्न है जिसका उपयोग ज्योतिष और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। ग्रीक दार्शनिकों ने इस रत्न की खोज 300 ईसा पूर्व की थी। यह मुख्य रत्नों का उप रत्न (विकल्प) होता है और आमतौर पर माला या अंगूठी के रूप में पहना जाता है। ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, बताए गए रंग के अनुसार कोई भी व्यक्ति हकीक की माला को अभिमंत्रित कर धारण कर सकता है।
**सुलेमानी हकीक माला के लाभ:**

1. **नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा:** यह माला पहनने वाले को बुरी नजर और काले जादू से बचाती है, जिससे उसकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
2. **सकारात्मक आभा का संचार:** यह वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा जोड़ती है और यिन-यांग, अर्थात सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के बीच संतुलन स्थापित करती है।
3. **आत्मविश्वास में वृद्धि:** सुलेमानी हकीक माला धारण करने से आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक प्रतिबद्ध होता है।
4. **शारीरिक संतुलन:** यह माला शरीर का संतुलन बनाती है, जो विशेष रूप से वृद्ध लोगों के लिए फायदेमंद है।
5. **भाग्य में सुधार:** इस माला को धारण करने से भाग्य का साथ मिलता है और यह बुरी किस्मत को समाप्त करती है।
6. **नींद में सुधार:** यह माला अच्छी नींद को प्रोत्साहित करती है और बुरे सपनों से सुरक्षा करती है।
7. **स्वास्थ्य लाभ:** यह पाचन में मदद करती है, चयापचय में सुधार करती है, और मांसपेशियों, जोड़ों और लसीका दर्द को ठीक करती है।
8. **वैवाहिक जीवन में सुधार:** यह यौन तनावों को शांत करती है और वैवाहिक विवादों को कम करती है, जिससे दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
9. **आध्यात्मिक शुद्धि:** यह जड़ चक्र को साफ करती है, जो रीढ़ के नीचे मौजूद होता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है।
10. **एकाग्रता में वृद्धि:** यह फोकस और प्रदर्शन में सुधार करती है, जिससे पहनने वाला अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक समर्पित होता है। **धारण करने की विधि:**

सुलेमानी हकीक माला को प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व या सुबह स्नान करने के बाद मंगलवार या शनिवार के दिन धारण करना शुभ फलदायक होता है। माला धारण करते समय शनि या मंगल देव को याद करते हुए पूरी श्रद्धा से पूजा अर्चना करके 108 बार शनि के बीज मंत्र – ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ या मंगल के बीज मंत्र – ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:’ का जाप करना चाहिए।
**नोट:** नहाते समय माला को उतार कर किसी स्वच्छ स्थान पर रखें। नहाने के पश्चात् पुनः धारण करें।
**सावधानी:**
हमारी तरफ से सामग्रियाँ पूर्णतः शुद्ध और ऊर्जान्वित (अभिमंत्रित) करके दी जाती हैं, उनका परिणाम व्यक्ति की भावना, उद्देश्य एवं सदुपयोग पर निर्भर करता है। यदि उद्देश्य या भावना सही नहीं है और प्रकृति या भगवान की मर्जी किसी काम में नहीं रहती, तो इसका परिणाम नहीं भी मिल सकता है। हम केवल भगवान के सेवक मात्र हैं; कर्म करना हमारा काम है, फल देना भगवान के हाथ में है। कोई भी सामग्री या वस्तु केवल आपकी सहायता मात्र है; पूर्णतः सामग्रियों और उपायों के अधीन न रहें।
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