श्वेतार्क माला, जिसे सफेद आक की जड़ से निर्मित किया जाता है, तंत्र शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह प्राकृतिक रूप से जाग्रत जड़ी के रूप में प्रसिद्ध है, क्योंकि श्वेतार्क में स्वयं गणेश जी का वास माना जाता है। इस माला को धारण करने से बुद्धि का विकास होता है और यह बुध ग्रह एवं गणेश मंत्रों के जप के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
श्वेतार्क माला के धारण से रोग और शोक का नाश होता है, साधनाएँ शीघ्र सफल होती हैं, और परिवार में कलह की स्थिति समाप्त होकर खुशहाली बनी रहती है। यह माला ऋद्धि-सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती है, एकाग्रता, स्वास्थ्य और उत्साह में वृद्धि करती है, तथा मन को शांत रखती है, जिससे क्रोध पर नियंत्रण बना रहता है।
श्वेतार्क की जड़ को तंत्र शास्त्र में ‘कल्पतरु’ के समान माना गया है, जो सभी कार्यों में विजय, संतान प्राप्ति, वशीकरण, शत्रु निवारण, सौभाग्य वृद्धि, और व्याधि नाश जैसे अनेक लाभ प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, शुभ मुहूर्त में श्वेतार्क की जड़ को धारण करने से व्यक्ति के घर-परिवार में आपसी संबंधों में सुधार होता है और खुशहाली बनी रहती है।
श्वेतार्क माला को धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, और समग्र कल्याण की प्राप्ति होती है। यह माला तंत्र साधकों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। The Natural Plants













