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पीला भूलन बेल ( सोम भूलन )

Original price was: ₹3,000.00.Current price is: ₹2,000.00.

पीला भूलन बेल (सोम भूलन) ek rare aur traditional jungle climber plant hai, jo apni unique yellow-toned appearance aur Ayurvedic, spiritual mahatva ke liye jana jata hai. Yeh fast-growing bel gardening, vastu aur rare plant collection ke liye perfect choice hai. Iska ornamental look aur traditional importance ise nature lovers aur exotic plant collectors ke beech kaafi popular banata hai.

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झारखंड के जंगलों में प्रकृति ने हमें ऐसी कई अद्भुत और रहस्यमई चीजें दी हैं, जिनकी अगर हमें जानकारी है तो वह हमारे लिए बेशकीमती हैं नहीं तो फिर अधूरी जानकारी खतरनाक भी साबित होती है. ऐसा ही एक जंगली पौधा है जिसे भूलनबेल कहा जाता है. ग्रामीणों के बीच ऐसा कहा जाता है कि जो इस भूलन बेल के पौधे को क्रॉस कर लेता है, वह रास्ता भटक जाता है.

ऐसे तो भुलल बेल चार प्रकार की पाई जाती है

1. काली भूलन बेल जिसे ( बड़ी भूलन ) कहते हैं !

2. सफेद भूलन बेल जिसे ( मंझली भूलन ) कहते हैं !

3. लाल भूलन बेल जिसे ( छोटी भूलन ) कहते हैं !

4. पीला भूलन बेल जिसे ( सोम भूलन ) कहते हैं !

पराया इन्हें पत्तों और फूलों से पहचाना जाता है!

सभी के अपने अलग-अलग कार्य हैं पराया सभी को तंत्र और आयुर्वेद में प्रयोग किए जाते हैं इस जानकारी को आप The Natural Plants से प्राप्त कर रहे हैं अब आगे

1. काली भूलन बेल का प्रयोग – किसी व्यक्ति या स्त्री को वशीकरण करना या अपना मनचाहा काम करवाने के लिए उपयोग किया जाता है !

2. सफेद भूलन बेल का प्रयोग – किसी जमीन जायदाद को प्राप्त या वापस पाना या कर्ज से मुक्ति होने के लिए प्रयोग किया जाता है !

3. लाल भूलन बेल का प्रयोग – किसी व्यक्ति के भाई संबंधी या कोई रिश्तेदार घर छोड़कर चला गया हो तो उसे टोना टोटके और तंत्र के जरिए वापस घर बुलाने में उपयोग किया जाता है !

4. पीला भूलन बेल का प्रयोग – तांत्रिक अनुष्ठान या सिद्धि प्राप्त करने साथ पूजा पाठ में इसे तांत्रिक लोग उपयोग करते हैं ! इन सभी को बहुत सारे लोग एक साथ भी प्रयोग करते हैं

अधिकतर इसे तंत्र क्रिया के लिए उपयोग किया जाता है. इसके अलावा यह आयुर्वेद में कई दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है

अगर आप इस पौधे को खरीदना चाहते हैं तो आप हमें कॉल या मैसेज 6200512423 / 9576566045 या हमारे वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं WWW.THE NATURAL PLANTS .COM

वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि “भूलन बेल के नाम से विख्यात यह पौधा घने जंगलों में पाया जाता है. जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं, लेकिन किस्से कहानियां जरूर सभी ने सुनी होंगी. झारखंड के दूर दराज जंगलों में भारिया जनजाति के लोगों का मानना है कि जिस स्थान पर यह पौधा पाया जाता है, उसके ऊपर से गुजरने वाले लोग अपना रास्ता भटक जाते हैं जिसके लिए कहावत भी है कि अगर कोई आने में देरी कर देता है तो उसके लिए कहा जाता है भूलन बेल लग गयी थी क्या ?”

तंत्र साधना के लिए किया जाता है उपयोग

वैसे इसे बहुत सारे पुराने लोग किसी स्त्री वशीकरण में या खोया प्यार पाना शराब छुड़ाना साथही किसी सदमे को भुलाने के लिए इसका उपयोग करते थे

वैसे इस पौधे का सबसे अधिक उपयोगी तंत्र सिद्धि के लिए किया जाता है. इस पौधे का जनजातियों में इतना खौफ है कि कई लोग तो इसका नाम लेने से कतराते हैं. आदिवासियों का कहना है कि अघोरी लोग इसे अपने तंत्र साधना के लिए उपयोग करते हैं. वनस्पति शास्त्र के विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि *”यह एक फर्न प्रजाति का पौधा है जो कि टेरिडोफाइट समूह का सदस्य है. सभी टेरिडोफाइट के विपरीत यह बेल के रूप में पाया जाता है

इसीलिये क्लाइंबिंग फर्न के नाम से जाना जाता है. यह एक दुर्लभ पौधा है जो अब बहुत कम स्थानों में बचा रह गया है. इसकी विशेष प्रकार की पत्तियां जो की स्पोरोफिल कहलाती हैं. यह एक महत्वपूर्ण औषधि भी है, जिसका प्रयोग बुखार, दाद-खाज व अन्य त्वचा रोगों साथ ही पीलिया, टाइफाइड, पुराने घावों को भरने, कृमि नाशक के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है.”

जरूरी सूचना

इस जानकारी को पुराने तांत्रिक तंत्र पुस्तक अघोरी वैद्य और साधुओं से प्राप्त किया गया है इसका प्रयोग आप अपना स्वयं की मानसिकता से करें या किसी तांत्रिक वैद्य अघोरी से परामर्श ले हमारा किसी के हृदय को ठेस पहुंचाना नहीं है

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