पीला भूलन बेल
पीला भूलन बेल (सोम भूलन)
एक दुर्लभ और रहस्यमयी औषधीय लता

प्रकृति ने हमें असंख्य ऐसे पौधे दिए हैं जिनमें अद्भुत औषधीय गुण छिपे हुए हैं। इन्हीं में से एक है पीला भूलन बेल, जिसे सोम भूलन के नाम से भी जाना जाता है। यह बेल भारत के कुछ विशिष्ट इलाकों में ही देखी जाती है और अपनी दुर्लभता तथा औषधीय उपयोगों के कारण विशेष शोध और संरक्षण की विषय-वस्तु है।

कई लोग इसे आम भूलन (Holarrhena antidysenterica) से मिलाते हैं, परंतु पीला भूलन बेल रूप, गुण और उपयोगों में भिन्न मानी जाती है। यह भारतीय आयुर्वेद और देसी हर्बल चिकित्सा में लंबे समय से उपयोग की जाती रही है, पर आज भी इसकी जानकारी बहुत कम लोगों तक सीमित है।

पौधे खरीदने के लिए
Click here  या कॉल करें –  6200512423
नाम और पहचान
सामान्य नाम पीला भूलन बेल / सोम भूलन
समूह लता / बेल वर्ग
संभावित वनस्पति कुल Apocynaceae / Asclepiadaceae (स्थानीय मतभेद)
पत्तियों का रंग गहरा हरा
फूलों की विशेषताएँ हल्के पीले, गुच्छों में
स्वाद कड़वा और कसैला
उपयोग औषधीय, धार्मिक और पर्यावरणीय

यह बेल मुख्यतः जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में पाई जाती है। इसकी पीली फूलों की वजह से इसे “पीला भूलन” कहा जाता है और कई क्षेत्रों में इसे “सोम” पौधे से जोड़कर भी देखा जाता है, जिससे इसके रहस्य और भी बढ़ जाते हैं।

स्वरूप एवं प्राकृतिक आवास

पीला भूलन बेल एक बहुवार्षिक (Perennial) लता है, जो अन्य पेड़ों या संरचनाओं पर चढ़कर बढ़ती है। इसे अच्छी धूप और मध्यम नमी वाली भूमि पसंद है। भारत में यह मुख्य रूप से—

  • मध्य भारत (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़)

  • राजस्थान के कुछ वन क्षेत्र

  • उत्तर भारत के पहाड़ों के निकट वन क्षेत्र

में छिटपुट रूप से पाया जाता है।

इसके फूल गर्मियों और वर्षा के मौसम में अधिक खिलते हैं। फल छोटे और बीज युक्त होते हैं, और इन्हीं बीजों का propagation अधिक सामान्य है।

पौधे का उपयोग — परंपरा से आधुनिकता तक

आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इस बेल को बहुउपयोगी माना गया है। इसके पत्ते, तना, फूल और जड़ — चारों हिस्सों का औषधीय उपयोग होता है।

प्रमुख औषधीय गुण
रोग/समस्या उपयोग
दस्त / पेचिश छाल या जड़ का क्वाथ
त्वचा रोग पत्ती का पेस्ट
पाचन तंत्र कड़वे रस का सेवन
ज्वर (बुखार) पत्तों का काढ़ा
गठिया / जोड़ों के दर्द तेल में उबालकर प्रभावित भाग पर
प्रतिरोधक क्षमता रस व सूखी जड़ का चूर्ण

इस बेल में एंटीबायोटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-डायरियल और एंटीसैप्टिक गुण पाए जाते हैं।


वैज्ञानिक और शोध दृष्टिकोण

चूँकि यह पौधा बहुत दुर्लभ है, इसलिए इस पर वैज्ञानिक अध्ययन सीमित उपलब्ध हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके गुण सर्पगंधा, भूलन और गिलोय जैसे पौधों के समान हैं, परंतु इसके प्रभाव अधिक तेज और केंद्रित होते हैं।

📢 ध्यान दें:
इसके उपयोग किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए, क्योंकि गलत मात्रा या गलत तरीके से प्रयोग से दुष्प्रभाव संभव हैं।

संरक्षण की आवश्यकता क्यों?

दुर्लभता का मुख्य कारण:

  • अत्यधिक कटाई और जड़ सहित उखाड़ लेना

  • जंगलों की घटती संख्या

  • स्थानीय उपयोग के बावजूद वैज्ञानिक संरक्षण की कमी

  • धीमी वृद्धि और कम प्रजनन क्षमता

यदि संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में यह पौधा विलुप्ति की ओर जा सकता है।

बागवानी और घर में खेती

पीला भूलन एक मजबूत लेकिन धीमी गति से बढ़ने वाली बेल है।
इसे घर या हर्बल गार्डन में लगाया जा सकता है।

लगाने का तरीका:
  1. बीज या कटिंग से पौधा तैयार करें

  2. अच्छी धूप वाले स्थान में लगाएँ

  3. सामान्य मिट्टी + जैविक खाद उपयुक्त

  4. ज्यादा पानी न दें — हल्की नमी पर्याप्त

  5. सहारा (Support) आवश्यक है

यदि वातावरण पसंद आ जाए, तो यह लंबे समय तक जीवित रहती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

कई क्षेत्रों में इसे पवित्र बेल माना गया है।
मान्यता है कि:

  • इसकी पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है

  • घर के द्वार पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है

  • यह देवताओं को प्रिय पौधा है

कुछ ग्रंथों में इसे “सोम बेल” के रूप में वर्णित किया गया है, जिससे इस पौधे को रहस्यमयी और दिव्य माना जाता है।

पहचान और भ्रम

कई बार इसे निम्न पौधों से भ्रमित कर लिया जाता है:

  • भूलन (Safed Kurchi)

  • गिलोय (Amrita)

  • हाड़जोड़ा / हड़जोड़

  • पीला कोड़रा

इसलिए असली पौधे की सही पहचान जरूरी है।
यदि आप इसे खरीदते हैं, तो प्रमाणित नर्सरी से ही लें।

निष्कर्ष

पीला भूलन बेल / सोम भूलन भारतीय जैव-विविधता की एक अमूल्य धरोहर है।
इसमें औषधीय, पर्यावरणीय और धार्मिक — तीनों प्रकार के लाभ हैं।
परंतु इसकी दुर्लभता हमें यह याद दिलाती है कि ऐसे पौधों का संरक्षण हर भारतीय की जिम्मेदारी है।

यदि हम इसे उचित स्थान देकर इसका संरक्षण करें, तो आने वाली पीढ़ियों को एक प्राकृतिक वरदान प्राप्त होगा —
स्वास्थ्य, शोध और संस्कृति — तीनों रूपों में!

पौधे खरीदने के लिए
Click here  या कॉल करें –  6200512423

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *